कबीर कहते हैं कि मनुष्य – शरीर एक घर के समान है जिसमें घर का मालिक सुख और चैन नहीं पाता क्योंकि घरवाले आपस में झगड़ते रहते हैं । घरवालों में हैं पाँच लड़के ( पाँच इन्द्रियाँ ) और पत्नी दुर्मति ( मन की दूषित प्रवृत्तियाँ ) । प्रत्येक इन्द्रिय अपनी इच्छा की पूर्ति केContinue reading “घर में झगड़ा- कबीर साहिब”
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जहाँ आसा तहाँ बासा
जब तक आकाश और पृथ्वी टल न जायें , तब तक व्यवस्था से एक मात्रा या एक बिंदु भी बिना पूरा हुए नहीं टलेगा ।सेंट मैथ्यू कहा जाता है कि कबीर साहिब जब बाहर जाया करते थे तो एक आदमी उन्हें अकसर खेत में बैठा मिलता था । एक दिन कबीर साहिब ने उससे कहाContinue reading “जहाँ आसा तहाँ बासा”
कबीर साहिब और रानी इन्दुमती
संत जब तक शरीर में रहते हैं , यह नहीं कहते कि हम गुरु हैं । वे दीनता और नम्रता रखते हैं । महाराज सावन सिंह रानी इन्दुमती , संत कबीर जो काशी में कपड़ा बुनकर अपनी जीविका कमाते थे , की अनन्य भक्त थी । जब कबीर साहिब रानी इन्दुमती को सचखंड ले गयेContinue reading “कबीर साहिब और रानी इन्दुमती”
भ्रंगी की सृजना
जिस नाम रिदै सो सभ ते ऊचा ॥ गुरु अर्जुन देव भ्रंगी के साथ एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है । कहा जाता है कि यह एक छोटे से बिल में अंडा देती है । फिर यह अपने लार्वे के लिए कोई कीड़ा ढूँढ़ लाती है । उस कीड़े को लार्वे के सामने रखकर बिलContinue reading “भ्रंगी की सृजना”
धर्म – ग्रन्थों का महत्त्व
ग्रन्थों – पोथियों में महात्माओं की रूहानी मण्डलों की यात्रा का वर्णन और उनके निजी अनुभवों का उल्लेख है , जिनको हमारे मार्ग – दर्शन के लिए उन्होंने पुस्तकों में लिखा । हमारे दिल में उनके लिये इज़्ज़त है । उन्हें पढ़कर हमारे अन्दर किसी हद तक परमार्थ का शौक़ और मालिक से मिलने काContinue reading “धर्म – ग्रन्थों का महत्त्व”
विरहिणी आत्मा
विरहिणी आत्मा (संत कबीर साहिब की बानी) वै दिन कब आबैंगे भाइ । जा कारनि हम देह धरी है , मिलिबौ अंगि लगाइ ॥ टेक ॥ हौं जानू जे हिल मिलि खेलूँ , तन मन प्रॉन समाइ । या काँमना करौ परपूरन , समरथ हौ राँम राइ ॥ माँहि उदासी माधौ चाहै , चितवत रैंनिContinue reading “विरहिणी आत्मा”