जो गुरु का भक्त है वह चाहे कैसा भी है , लेकिन गुरु उसे नरकों में नहीं जाने देता । महाराज सावन सिंह जब राजा जनक स्थूल शरीर को त्यागकर अपने धाम की ओर जा रहे थे , रास्ते में क्या देखते हैं कि नरकों में जीव जल रहे हैं और चीख – पुकार करContinue reading “भजन – सुमिरन का महत्त्व”
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डल्ला की परीक्षा
मैं तेरी चितौनियों में उलझा हुआ हूँ , हे प्रभु ! मुझे शर्मिंदा न होने दे । जब तू मेरी सूझ बढ़ायेगा , तब मैं तेरे हुक्म अनुसार चलूँगा । साम्ज़ ज़िक्र है कि मुसलमानों की हुकूमत के दिनों में एक ऐसा समय आया जब गुरु गोबिन्द सिंह जी को मजबूरन आनन्दपुर छोड़ना पड़ा ।Continue reading “डल्ला की परीक्षा”
झूठे वायदों की सज़ा
अनेक लोग अपने ज्ञान का प्रदर्शन करके अपनी प्रशंसा करवाने का प्रयास करते हैं पर वे धन्य हैं जिन्होंने प्रभु प्रेम के लिए अपने मन को अन्य सभी इच्छाओं से ख़ाली कर दिया है ।सेंट फ्रांसिस ऑफ़ असिसी ज़िक्र है कि बुल्लेशाह बड़ा आलिम – फ़ाज़िल था । चालीस साल खोज की , बहुत –Continue reading “झूठे वायदों की सज़ा”
प्रेम से प्रेम , घृणा से घृणा
परमात्मा प्रेम है । जो प्रेम में डूबा हुआ है , वह परमात्मा में समाया हुआ है , और परमात्मा उसमें समाया हुआ है । सेंट जॉन कहते हैं कि एक बार अकबर बादशाह और बीरबल कहीं जा रहे थे । कुछ फ़ासले पर उन्हें एक जाट आता नज़र आया । अकबर बादशाह ने बीरबलContinue reading “प्रेम से प्रेम , घृणा से घृणा”
ईश्वर के दर्शन क्यो नहीं होते ?
एक महात्मा के पास दूर-दूर से लोग अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए आते थे। एक बार एक व्यक्ति उनके पास आया और बोला,’महाराज, मैं लंबे समय से ईश्वर की भक्ति कर रहा हूं, फिर भी मुझे ईश्वर के दर्शन नहीं होते। कृपया मुझे उनके दर्शन कराइए।’महात्मा बोले,–‘तुम्हें इस संसार में कौन सी चीजेंContinue reading “ईश्वर के दर्शन क्यो नहीं होते ?”
फटा कुर्ता
वह हमारी सब अच्छाइयों और बुराइयों को जानता है । उससे कुछ भी छिपा नहीं है । वह जानता है कि हमारे रोग की दवा क्या है और हम पापियों का उद्धार कैसे हो सकता है । दीन बनो , क्योंकि वह दीनों पर दया करता है । अन्सारी ऑफ़ हैरात हजरत यूसुफ़ जिसको बाइबलContinue reading “फटा कुर्ता”
कबीर साहिब द्वारा राजा की परीक्षा
जब आप नौ दरवाज़ों को छोड़कर ब्रह्म , पारब्रह्म में जायेंगे तो आपको पता लग जायेगा कि गुरु क्या है और क्या देता है ।अगर अंदर जाकर देख लो तो यक़ीन पुख़्ता हो जायेगा ।महाराज सावन सिंह कबीर साहिब जुलाहा थे । राजा बीर सिंह राजपूत उनका सेवक था । उसका उनके साथ बहुत प्यारContinue reading “कबीर साहिब द्वारा राजा की परीक्षा”
गुरु समान दूसर नहिं कोय
प्रभुरूपी सत्य के सार की कल्पना भी असंभव है । उस परम मित्र का वर्णन कोई कैसे कर सकता है जिसके समान कोई दूसरा है ही नहीं।। मौलाना रूम जब शुकदेव गुरु धारण करके , नाम लेकर उनके आदेशानुसार कमाई करके अपने पिता वेदव्यास के पास गया , तो उन्होंने पूछा , ‘ गुरु कैसाContinue reading “गुरु समान दूसर नहिं कोय”
पपीहे का प्रण
मी जिउ चात्रिक जल प्रेम पिआसा ॥ जिउ मीना जल माहे उलासा ॥ नानक हर रस पी त्रिपतासा।। गुरु नानक एक दिन कबीर साहिब गंगा के किनारे घूम रहे थे । उन्होंने देखा कि एक पपीहा प्यास से निढाल होकर नदी में गिर गया है । पपीहा स्वाति बूंद के अलावा दूसरा पानी नहीं पीताContinue reading “पपीहे का प्रण”
सबसे बड़ा कौन ?
गुरु और मालिक में कोई अंतर नहीं , दोनों वास्तव में एक ही हैं । महाराज सावन सिंह एक पादरी हमेशा बड़े महाराज जी के साथ बहस करता रहता था । एक बार जब आप ब्यास स्टेशन पर उतरे , तो वह बोला कि एक सवाल का जवाब दो । आपने कहा , ‘ बड़ीContinue reading “सबसे बड़ा कौन ?”