डल्ला की परीक्षा

मैं तेरी चितौनियों में उलझा हुआ हूँ , हे प्रभु ! मुझे शर्मिंदा न होने दे । जब तू मेरी सूझ बढ़ायेगा , तब मैं तेरे हुक्म अनुसार चलूँगा । साम्ज़ ज़िक्र है कि मुसलमानों की हुकूमत के दिनों में एक ऐसा समय आया जब गुरु गोबिन्द सिंह जी को मजबूरन आनन्दपुर छोड़ना पड़ा ।Continue reading “डल्ला की परीक्षा”

किसका सेवक ?

कुटुम्ब परिवार मतलब का । बिना धन पास नहिं आई।।स्वामी जी महाराज गुरु गोबिन्द सिंह जी का दरबार लगा हुआ था । सिक्खी का मज़मून चल रहा था । गुरु साहिब ने कहा कि गुरु का शिष्य कोई – कोई है , बाक़ी सब अपने मन के गुलाम हैं या स्त्री और बच्चों के गुलामContinue reading “किसका सेवक ?”

झूठे वायदों की सज़ा

अनेक लोग अपने ज्ञान का प्रदर्शन करके अपनी प्रशंसा करवाने का प्रयास करते हैं पर वे धन्य हैं जिन्होंने प्रभु प्रेम के लिए अपने मन को अन्य सभी इच्छाओं से ख़ाली कर दिया है ।सेंट फ्रांसिस ऑफ़ असिसी ज़िक्र है कि बुल्लेशाह बड़ा आलिम – फ़ाज़िल था । चालीस साल खोज की , बहुत –Continue reading “झूठे वायदों की सज़ा”

प्रेम से प्रेम , घृणा से घृणा

परमात्मा प्रेम है । जो प्रेम में डूबा हुआ है , वह परमात्मा में समाया हुआ है , और परमात्मा उसमें समाया हुआ है । सेंट जॉन कहते हैं कि एक बार अकबर बादशाह और बीरबल कहीं जा रहे थे । कुछ फ़ासले पर उन्हें एक जाट आता नज़र आया । अकबर बादशाह ने बीरबलContinue reading “प्रेम से प्रेम , घृणा से घृणा”

एक कान से सुनना , दूसरे से निकाल देना

उस प्रभु ने अपार कृपा करके आपको एक ऐसी उत्तम दात बख्शी है जिसके सामने इस संसार की सारी धन – दौलत तुच्छ है । पर इस दात का लाभ आपको तभी पहुँचेगा जब आप उसका अभ्यास करेंगे । महाराज सावन सिंह दिल्ली में एक महाजन था । उसे साधु – संतों के सत्संग सुननेContinue reading “एक कान से सुनना , दूसरे से निकाल देना”

ईश्वर के दर्शन क्यो नहीं होते ?

एक महात्मा के पास दूर-दूर से लोग अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए आते थे। एक बार एक व्यक्ति उनके पास आया और बोला,’महाराज, मैं लंबे समय से ईश्वर की भक्ति कर रहा हूं, फिर भी मुझे ईश्वर के दर्शन नहीं होते। कृपया मुझे उनके दर्शन कराइए।’महात्मा बोले,–‘तुम्हें इस संसार में कौन सी चीजेंContinue reading “ईश्वर के दर्शन क्यो नहीं होते ?”

चार राम

जग में चारों राम हैं , तीन राम व्यवहार । एक्कारमा चौथा राम निज सार है , ताका करो विचार ॥ एक राम दशरथ घर डोलै , एक राम घट घट में बोले । एक राम का सकल पसारा , एक राम त्रिभुवन ते न्यारा ॥ कबीर समग्र , भाग 1 , पृ .462 एकContinue reading “चार राम”

फटा कुर्ता

वह हमारी सब अच्छाइयों और बुराइयों को जानता है । उससे कुछ भी छिपा नहीं है । वह जानता है कि हमारे रोग की दवा क्या है और हम पापियों का उद्धार कैसे हो सकता है । दीन बनो , क्योंकि वह दीनों पर दया करता है । अन्सारी ऑफ़ हैरात हजरत यूसुफ़ जिसको बाइबलContinue reading “फटा कुर्ता”

कबीर साहिब द्वारा राजा की परीक्षा

जब आप नौ दरवाज़ों को छोड़कर ब्रह्म , पारब्रह्म में जायेंगे तो आपको पता लग जायेगा कि गुरु क्या है और क्या देता है ।अगर अंदर जाकर देख लो तो यक़ीन पुख़्ता हो जायेगा ।महाराज सावन सिंह कबीर साहिब जुलाहा थे । राजा बीर सिंह राजपूत उनका सेवक था । उसका उनके साथ बहुत प्यारContinue reading “कबीर साहिब द्वारा राजा की परीक्षा”

नरकों और स्वर्गों को जला दो

सुरग मुकति बैकुंठ सभ बांछह नित आसा आस करीजै । हर दरसन के जन मुकति न मांगह मिल दरसन त्रिपत मन धीजै।। गुरु रामदास एक दिन बसरा की महात्मा राबिया बसरी फूट – फूटकर रो रही थी , मानो उसका हृदय फट रहा हो । उसको दुःख से व्याकुल देखकर उसके पड़ोसी उसके चारों ओरContinue reading “नरकों और स्वर्गों को जला दो”

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