हमारे प्यार का खोखलापन

परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है ; मैं किससे डरूँ ? परमेश्वर मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ है , मैं किसका भय खाऊँ ? साम्ज़ एक बुढ़िया थी । उसकी एक जवान लड़की थी । इत्तफ़ाक़ से वह लड़की सख़्त बीमार हो गयी । बहुत इलाज करवाया लेकिन फ़ायदा न हुआ । बुढ़िया कहनेContinue reading “हमारे प्यार का खोखलापन”

कबीर साहिब और रानी इन्दुमती

संत जब तक शरीर में रहते हैं , यह नहीं कहते कि हम गुरु हैं । वे दीनता और नम्रता रखते हैं । महाराज सावन सिंह रानी इन्दुमती , संत कबीर जो काशी में कपड़ा बुनकर अपनी जीविका कमाते थे , की अनन्य भक्त थी । जब कबीर साहिब रानी इन्दुमती को सचखंड ले गयेContinue reading “कबीर साहिब और रानी इन्दुमती”

मूर्ख को समझाना बेकार

उन जैसा बहरा और कौन हो सकता है जो सुनेंगे नहीं ।। कहावत एक बार किसी मूर्ख व्यापारी ने एक घोड़े पर एक तरफ़ दो मन गेहूँ लाद दिया तथा दूसरी ओर दो मन रेत डाल ली ताकि बोझ बराबर हो जाये और घोड़े को तकलीफ़ न हो । एक ग़रीब आदमी ने , जोContinue reading “मूर्ख को समझाना बेकार”

विरह – वेदना

प्रभात – वेला की इबादत और रात भर मालिक के वियोग में विलाप मालिक की प्राप्ति के ख़ज़ाने की कुंजी हैं । ख्वाजा हाफ़िज़ शेख शिबली एक दिन अपने शिष्यों के साथ बैठे थे । सर्दी का मौसम था , आग जल रही थी । अचानक उनका ध्यान चूल्हे में जलती हुई लकड़ी के एकContinue reading “विरह – वेदना”

भ्रंगी की सृजना

जिस नाम रिदै सो सभ ते ऊचा ॥ गुरु अर्जुन देव भ्रंगी के साथ एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है । कहा जाता है कि यह एक छोटे से बिल में अंडा देती है । फिर यह अपने लार्वे के लिए कोई कीड़ा ढूँढ़ लाती है । उस कीड़े को लार्वे के सामने रखकर बिलContinue reading “भ्रंगी की सृजना”

ज्योतिष आद्यात्म की नजर से…

ज्योतिष द्वारा लोग भविष्य में घटनेवाली शुभ और अशुभ घटनाओं का पता लगाने का प्रयत्न करते है।लोग ज्योतिष विद्या द्वारा यह जानने का प्रयत्न करते है कि किस काम के लिए कौन सी घड़ी या कोन सा मुहूर्त शुभ है। इसी तरह वे यह जानने की भी कोशिश करते है कि किन स्थानों पर जानाContinue reading “ज्योतिष आद्यात्म की नजर से…”

असली विद्वान कौन ?

मैं अपनी मूर्खता भरी बातें करनेवाली ज़बान से परमात्मा की भेद भरी बातों को बयान करने की हिम्मत नहीं कर सकता । अगर मैं हिम्मत करूँ तो भी बयान नहीं कर सकता । क्लाउड ऑफ़ अननोइंग एक बार एक विद्यार्थी अपनी बी . ए . की पढ़ाई पूरी करके अपने घर जा रहा था ।Continue reading “असली विद्वान कौन ?”

अंधा और भूलभुलैयाँ

कई जनम भए कीट पतंगा ॥ कई जनम गज मीन कुरंगा ॥ कई जनम पंखी सरप होइओ ॥ कई जनम हैवर ब्रिख जोइओ । मिल जगदीस मिलन की बरीआ ॥ चिरंकाल इह देह संजरीआ ॥ गुरु अर्जुन देव एक आदमी अंधा भी था और साथ ही गंजा भी था । थोड़ी सी ग़लती के कारणContinue reading “अंधा और भूलभुलैयाँ”

दुनिया के राज्य का मोल

गुरु से गुरु की ही माँग कीजिये , क्योंकि जब वह आपको यह बख्रिशश कर देते हैं तो फिर उनके साथ ही सारी चीजें मिल जाती हैं । महाराज सावन सिंह इब्राहीम अधम ने वर्ष अपने सतगुरु कबीर साहिब के चरणों में रहकर सेवा की और फिर उनका आशीर्वाद प्राप्त करके उनकी आज्ञा लेकर आपContinue reading “दुनिया के राज्य का मोल”

व्यर्थ गयी कमाई

जनम जनम की इस मन कउ मल लागी काला होआ सिआह ॥ खंनली धोती उजली न होवई जे सउ धोवण पाह।।14 गुरु अमरदास पराशर जी सारी उम्र योगाभ्यास में रहे । पूर्ण योगी होकर घर को वापस आ रहे थे । रास्ते में एक नदी पड़ती थी । जब वहाँ आये तो मल्लाह से कहाContinue reading “व्यर्थ गयी कमाई”

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