आधी रात का सूरज

तो भी अंधकार तुझसे न छिपायेगा , रात तो दिन के समान प्रकाश देगी ; क्योंकि तेरे लिए अंधियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं । साम्ज़ एक बार का ज़िक्र है , गुरु नानक साहिब के पास आपके बड़े लड़के श्री चन्द जी बैठे थे । आधी रात का समय था । आपने कहाContinue reading “आधी रात का सूरज”

अमृत वेला- Time of Nectar

ग्रंथो शास्त्रों में सुबह सवेरे यानी रात के पिछले पहर को अमृत वेला, ब्रह्म मुहूर्त, ब्रह्म घड़ी आदि कहा गया है। परमेश्वर के भक्तों ने अमृत वेला को भक्ति के लिए खास तौर से लाभदायक माना है। सुबह का वातावरण भक्ति के लिए बहुत उत्तम होता है। सबह के समय रात भर सोने के बादContinue reading “अमृत वेला- Time of Nectar”

रूहानियत की जरूरत

रूहानियत की जरूरत आजकल सारे संसार में खींच – तान , चिन्ता और फ़िक्र का राज्य नज़र आ रहा है । पहुँचे हुए महात्माओं को छोड़कर कोई भी , चाहे वह किसी भी वर्ग से सम्बन्धित है , इससे नहीं बच सका है । यह इस बात का प्रमाण है कि आजकल रूहानियत का दिवालाContinue reading “रूहानियत की जरूरत”

धरती की परिक्रमा

गुरु के बिना सब कर्म – धर्म निष्फल हैं , ‘ बिन मुर्शिद कामल बुल्लया तेरी ऐवें गई इबादत कीती ‘ । जब तक जीव की अंतर की आँख नहीं खुलती और हक़ीक़त से संबंध नहीं होता , उसका कल्याण नहीं हो सकता । इस कार्य के लिए हमें किसी गुरु की शरण लेनी पड़तीContinue reading “धरती की परिक्रमा”

पीर की जूती का मोल

जब हमारा प्रेम सबकी ओर से हटकर केवल गुरु के साथ – लग जाता है , तो हम दुनिया के सब बंधनों और मलिनताओं से मुक्त हो जाते हैं और परमात्मा से जुड़ जाते हैं। महाराज सावन सिंह अमीर खुसरो , निज़ामुद्दीन औलिया का शागिर्द और काबुल के हाकिम का मुलाज़िम था । बड़ा कमाईContinue reading “पीर की जूती का मोल”

प्रभु की इच्छा या इंसान की मरज़ी

मनुष्य अपनी विपत्तियों को निमंत्रण देता है और फिर इन दुःखदायी अतिथियों के प्रति विरोध प्रकट करता है , क्योंकि वह भूल जाता है कि उसने कैसे , कब और कहाँ उन्हें निमंत्रण पत्र लिखे तथा भेजे थे । परंतु समय नहीं भूलता ; समय उचित अवसर पर हर निमंत्रण – पत्र ठीक पते परContinue reading “प्रभु की इच्छा या इंसान की मरज़ी”

हीरे का मोल

आठ गांठ कोपीन के , साधु न मानै शंक । नाम अमल माता रहै , गिनै इंद्र को रंक । कबीर साहिब मेवाड़ की रानी मीराबाई पंद्रहवीं शताब्दी के मशहूर संत गुरु रविदास जी की शिष्या थीं । उनकी सखियाँ – सहेलियाँ गुरु रविदास जी पर नाक – मुँह चढ़ाती थीं । वे मीराबाई कोContinue reading “हीरे का मोल”

गड़रिये की भेंट

वे लोग धन्य हैं जिनका मन पवित्र है , क्योंकि केवल उन लोगों को ही प्रभु का दीदार हासिल होगा । सेंट मैथ्यू मनुष्य के अंदर दो बड़े गुण हैं । एक भय और दूसरा भाव यानी डर और प्यार । जिसको परमात्मा का डर है , उसको परमात्मा से प्यार भी है । जिसकोContinue reading “गड़रिये की भेंट”

तीर्थ आद्यात्म की नजर से

संत महात्मा प्रभु की प्राप्ति के लिए मन की निर्मलता का उपदेश देते है। हम इसके लिए आसान से आसान साधन ढूंढने की कोशिश करते है। हम समझते है कि तीर्थो में स्नान करने से मन निर्मल हो जाएगा और हम प्रभु मिलाप करने में सफल हो जायेगे। पर ऐसा सोचना ठीक नहीं है। तीर्थContinue reading “तीर्थ आद्यात्म की नजर से”

मालिक सब देखता है

ऐसा कोई स्थान नहीं जहाँ मालिक नहीं है । तेरी बादशाहत से कहाँ जाऊँ ? तेरी हुजूरी से भागकर कहाँ जाऊँ ? यदि मैं आसमानों पर चढ़ जाऊँ , तू वहाँ भी मौजूद है । यदि पाताल में अपना डेरा तान लूँ तो तू वहाँ भी है ।129 साम्ज़ किसी महात्मा के पास दो आदमीContinue reading “मालिक सब देखता है”

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