संतों महात्माओं के उपदेश का आदर करो और खुद को पहचानों आप क्या हो और क्या कर रहे हो ?एक भिखारी था । उसने सम्राट होने के लिए कमर कसी और चौराहे पर अपनी फटी-पुरानी चादर बिछा दी, अपनी हाँडी रख दी और सुबह-दोपहर-शाम भीख माँगना शुरू कर दिया क्योंकि उसे सम्राट होना था। लेकिनContinue reading “🧘🏽♂️बाहर नहीं अंदर खोजें🧘🏽♂️”
Author Archives: Pradeep Th
गुरु कौन
बहुत समय पहले की बात है, किसी नगर में एक बेहद प्रभावशाली महंत रहते थे। उन के पास शिक्षा लेने हेतु दूर दूर से शिष्य आते थे। एक दिन एक शिष्य ने महंत से सवाल किया, स्वामीजी आपके गुरु कौन है?आपने किस गुरु से शिक्षा प्राप्त की है? महंत शिष्य का सवाल सुन मुस्कुराए औरContinue reading “गुरु कौन”
!! नेत्रहीन संत !!
एक बार एक राजा अपने सहचरों के साथ शिकार खेलने जंगल में गया था। वहाँ शिकार के चक्कर में एक दूसरे से बिछड़ गये और एक दूसरे को खोजते हुये राजा एक नेत्रहीन संत की कुटिया में पहुँच कर अपने बिछड़े हुये साथियों के बारे में पूछा। नेत्र हीन संत ने कहा महाराज सबसे पहलेContinue reading “!! नेत्रहीन संत !!”
रामायण
रामायण…‘रा’ का अर्थ है प्रकाश, ‘मा’ का अर्थ है मेरे भीतर, यानी रामा का अर्थ है मेरे भीतर का प्रकाश। दशरथ और कौसल्या ने राम का जन्म दिया। दशरथ का अर्थ है 10 रथ। दस रथ 5 इन्द्रिय अंगों (ज्ञानेंद्रिय) और 5 क्रिया अंगों (कर्मेन्द्रिय) के प्रतीक हैं। कौशल्या का अर्थ है कौशल। 10 रथोंContinue reading “रामायण”
परमात्मा कहा है?
गुरु नानक देव जी की वाणी है : हर मंदर सोई आखीऐ जिथहो हर जाता ॥ मानस देह गुर बचनी पाइआ सभ आतम राम पछाता ॥ बाहर मूल न खोजीऐ घर माहे बिधाता ॥ मनमुख हर मंदर की सार न जाणनी तिनी जनम गवाता ॥ (आदि ग्रंथ पेज न 953) अर्थात् उस स्थान को हीContinue reading “परमात्मा कहा है?”
परमात्मा खुद लेने आता है!
एक बादशाह ने वज़ीर से पूछा- परमात्मा के साथ मिलाप कैसे हो सकता है? वजीर बोला, परमात्मा स्वयं कामिल मुर्शिद का रूप धारण करके जीव को अपने साथ मिलाने के लिए इस संसार में आता है। बादशाह बोला, परमात्मा के पास तो फरिश्तों की फौज है, फिर उसे स्वयं इंसान के रूप में यहां आनेContinue reading “परमात्मा खुद लेने आता है!”
श्रद्धा के फूल
एक बार किसी गांव में एक बडे संत महात्मा का अपने शिष्यो सहित आगमन हुआ। सब इस होड़ में लग गये कि क्या भेंट करें। इधर गाँव में एक गरीब मोची था। उसने देखा कि मेरे घर के बाहर के तालाब में बेमौसम का एक कमल खिला है। उसकी इच्छा हुई कि, आज नगर मेंContinue reading “श्रद्धा के फूल”
परमार्थ के मार्ग में साधक की चार अवस्थाएँ
” परमार्थ के मार्ग में साधक की चार अवस्थाएँ 1. कर्मकाण्ड या शरीयत : अच्छे कार्य करना जैसा कि संसार के सब धार्मिक ग्रन्थों में बताया गया है । 2. उपासना या तरीक़त : किसी कामिल गुरु के आदेश और मार्ग – दर्शन के अनुसार परमार्थ के कार्य करना । मन और इन्द्रियों को वशContinue reading “परमार्थ के मार्ग में साधक की चार अवस्थाएँ”
गुरु की मौज
“परमार्थी साखी” ये बात उन दिनों की है जब बाबा जैमल सिंह जी ने महाराज सावन सिंह जी को अपनी गुरु गद्दी सौपने का निर्णय कर लिया था। उस दिन बाबा जैमल सिंह ने महाराज सावन सिंह जी से कहा कि – जी मेरे लिए अकाल पुरुष का हुकुम आ चूका है अब मेरे बादContinue reading “गुरु की मौज”
ध्यान – साधना का लक्ष्यः आत्म – साक्षात्कार
उपनिषदों के अनुसार जप – तप , दान – पुण्य और धर्मग्रंथों के पठन – पाठन में परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती । उसे केवल ध्यान – साधना द्वारा अंतर्मुख होकर ही प्राप्त किया जा सकता है । न चक्षुधा गृहाते नापि वाचा नान्यैर्देवैः तपसा कर्मणा वा । ज्ञानप्रसादेन विशुद्धसत्त्वः ततस्तु तं पश्यते निष्कलं ध्यायमानःContinue reading “ध्यान – साधना का लक्ष्यः आत्म – साक्षात्कार”