सांई ईद कद है ?

ईद का दिन था , लोग ईद की नमाज अदा करके वापस आ रहे थे । राह में एक पूर्ण मुर्शीद का मुरीद खड़ा था , हर राहगीर से पूछ रहा था , सांई ईद कद है ? लोग हंसते और कहते ओ सांई तेरे को नहीं पता ईद तां अज है । उसी राहContinue reading “सांई ईद कद है ?”

ध्यान किसका करें

ध्यान किसका करें तीन चीजों का ध्यान हमारे रूहानी सफ़र में हमारा सहायक हो सकता है : . परमात्मा का ध्यान नाम या शब्द का ध्यान जो परमात्मा का क्रियात्मक रूप है गुरु का ध्यान जो परमात्मा का प्रकट रूप है . हमारे जीवन का उद्देश्य मालिक को देखना है , उसका सिमरन और उसकाContinue reading “ध्यान किसका करें”

कर्मों के उत्तराधिकारी

गांव-देहात में एक कीड़ा पाया जाता है, जिसे गोबरैला कहा जाता है। उसे गाय, भैंसों के ताजे गोबर की बू बहुत भाती है! वह सुबह से गोबर की तलाश में निकल पड़ता है और सारा दिन उसे जहां कहीं गोबर मिल जाता है, वहीं उसका गोला बनाना शुरू कर देता है। शाम तक वह एकContinue reading “कर्मों के उत्तराधिकारी”

सत्संग की सच्ची ख्वाइश का फल

पाकिस्तान में कालाबाग में अक्सर हुजूर बड़े महाराज (सतगुरु) सत्संग देने जाते थे। कालाबाग के पास एक गांव में एक बुजुर्ग महिला जिसकी उम्र अस्सी साल से ऊपर थी को भी पता चला कि ब्यास वाले संत कालाबाग में सत्संग देने आने वाले हैं। उस बुजुर्ग महिला ने अपने लड़के से कहा कि तुम मुझेContinue reading “सत्संग की सच्ची ख्वाइश का फल”

परमात्मा जब किसी से नाराज़ होता है

परमात्मा जब किसी से नाराज़ होता है तो वह उसका रिज्क (खाना पीना )नहीं बन्द करता और न ही जीव को कोई दुख देता है और न ही सूर्य को आज्ञा देता है कि इसके आंगन को रोशनी नहीं देना । बल्कि परमात्मा जब किसी से नाराज़ होता है तो वह उसका वो वक्त छिनContinue reading “परमात्मा जब किसी से नाराज़ होता है”

तू सच में बहुत दयालु हैं!

एक संत हुआ करते थे । उनकी इबादत या भक्ति इस कदर थीं कि वो अपनी धुन में इतने मस्त हो जाते थे की उनको कुछ होश नहीं रहता था । उनकी अदा और चाल इतनी मस्तानी हो जाती थीं । वो जहाँ जाते , देखने वालों की भीड़ लग जाती थी। और उनके दर्शनContinue reading “तू सच में बहुत दयालु हैं!”

असल गुरु की पहचान

गुर पीर सदाए मंगण जाए ॥ ता कै मूल न लगीऐ पाए ॥ घाल खाए किछ हथहो दे ॥ नानक राह पछाणह से ॥ जो गुरु और पीर अपने शिष्यों – सेवकों से माँगते फिरते हैं , उनके पैरों पर माथा ही नहीं टेकना चाहिए । कैसे महात्मा को ढूँढ़ना है ? जो स्वयं मेहनतContinue reading “असल गुरु की पहचान”

राम कहा हैं?

चौथी पातशाही श्री गुरु रामदास जी कहते हैं : कासट मह जिउ है बैसंतर मथ संजम काट कढीजै । राम नाम है जोत सबाई तत गुरमत काढ लईजै ॥ जिस तरह लकड़ी के अंदर अग्नि होती है , न अग्नि नज़र आती है , ही उस अग्नि से हम फ़ायदा उठा सकते हैं । जिसContinue reading “राम कहा हैं?”

करना क्या है? कर क्या रहे है?

धंधै धावत जग बाधिआ ना बूझै वीचार ॥ जमण मरण विसारिआ मनमुख मुगध गवार ॥ गुरु साहिब फ़रमाते हैं कि हम मनमुख हैं , मुगध हैं , गँवार हैं कि हम हमेशा पेट के धंधों में ही दिन – रात भटकते फिरते हैं । जिस मक़सद के लिए परमात्मा ने हमें यहाँ भेजा है उसकेContinue reading “करना क्या है? कर क्या रहे है?”

शिष्य तैयार

जब शिष्य तैयार हो जाता है तो उसका गुरु से मिलाप हो जाता है । सच पूछो तो गुरु ऐसे शिष्य की आप ही तलाश कर लेता है। गुरु के लिए आत्मा को ऊपर ले जाना मुश्किल नहीं , लेकिन उचित अभ्यास के बिना ऊपर ले जाने से उस आत्मा का नुकसान होता है ।Continue reading “शिष्य तैयार”

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