एक बार एक सत्संगी दरबार साहिब आ रहा था।लंगर के लिये कुछ रसद भी साथ उठा कर आ रहा था। यह गुरु अर्जुन देव जी के समय की बात है। गर्मी के दिन थे।अमृतसर शहर से थोड़ा पहले वह एक बृक्ष की छावं में आराम करने बैठा। गुरु के दर्शन के लिए वह पहली बारContinue reading ““निमाणा-निताणा””
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मन की बाँसुरी
” बाँस की बाँसुरी में से आवाज निकलती है क्योंकि वह खोखली होती है। ठोस लकड़ी का टुकड़ा बाँस की बाँसुरी वाला काम नहीं कर सकता। अभ्यास के समय मन को विचारों से ख़ाली कर देना बाँसुरी बन जाने के समान है। जब अपने आप को अन्तर में विचारों से पूरी तरह ख़ाली करके भजनContinue reading “मन की बाँसुरी”
कर्मों के उत्तराधिकारी
गांव-देहात में एक कीड़ा पाया जाता है, जिसे गोबरैला कहा जाता है। उसे गाय, भैंसों के ताजे गोबर की बू बहुत भाती है! वह सुबह से गोबर की तलाश में निकल पड़ता है और सारा दिन उसे जहां कहीं गोबर मिल जाता है, वहीं उसका गोला बनाना शुरू कर देता है। शाम तक वह एकContinue reading “कर्मों के उत्तराधिकारी”
राम कहा हैं?
चौथी पातशाही श्री गुरु रामदास जी कहते हैं : कासट मह जिउ है बैसंतर मथ संजम काट कढीजै । राम नाम है जोत सबाई तत गुरमत काढ लईजै ॥ जिस तरह लकड़ी के अंदर अग्नि होती है , न अग्नि नज़र आती है , ही उस अग्नि से हम फ़ायदा उठा सकते हैं । जिसContinue reading “राम कहा हैं?”
करना क्या है? कर क्या रहे है?
धंधै धावत जग बाधिआ ना बूझै वीचार ॥ जमण मरण विसारिआ मनमुख मुगध गवार ॥ गुरु साहिब फ़रमाते हैं कि हम मनमुख हैं , मुगध हैं , गँवार हैं कि हम हमेशा पेट के धंधों में ही दिन – रात भटकते फिरते हैं । जिस मक़सद के लिए परमात्मा ने हमें यहाँ भेजा है उसकेContinue reading “करना क्या है? कर क्या रहे है?”
🧘🏽♂️बाहर नहीं अंदर खोजें🧘🏽♂️
संतों महात्माओं के उपदेश का आदर करो और खुद को पहचानों आप क्या हो और क्या कर रहे हो ?एक भिखारी था । उसने सम्राट होने के लिए कमर कसी और चौराहे पर अपनी फटी-पुरानी चादर बिछा दी, अपनी हाँडी रख दी और सुबह-दोपहर-शाम भीख माँगना शुरू कर दिया क्योंकि उसे सम्राट होना था। लेकिनContinue reading “🧘🏽♂️बाहर नहीं अंदर खोजें🧘🏽♂️”
ऊंची उड़ान
बहुत समय पहले की बात है,एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये, वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे,राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया। कुछ समय पश्चात राजा ने देखाContinue reading “ऊंची उड़ान”
सत्संग का फायदा होगा जब हम अमल करेगें
एक संत ने अपने दो शिष्यों को दो डिब्बों में मूँग के दाने दिये और कहाः “ये मूँग हमारी अमानत हैं। ये सड़े गले नहीं बल्कि बढ़े-चढ़े यह ध्यान रखना। दो वर्ष बाद जब हम वापस आयेंगे तो इन्हें ले लेंगे संत तो तीर्थयात्रा के लिए चले गये इधर एक शिष्य ने मूँग के डिब्बेContinue reading “सत्संग का फायदा होगा जब हम अमल करेगें”
हार- जीत का फैसला
बहुत समय पहले की बात है। आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र के बीच सोलह दिन तक लगातार शास्त्रार्थ चला। शास्त्रार्थ में निर्णायक थीं- मंडन मिश्र की धर्म पत्नी देवी भारती। हार- जीत का निर्णय होना बाक़ी था, इसी बीच देवी भारती को किसी आवश्यक कार्य से कुछ समय के लिये बाहर जाना पड़ गया। लेकिनContinue reading “हार- जीत का फैसला”
एक कथा -मेरी भी और आपकी भी
बहुत समय पहले की बात है, एक राजा जंगल में शिकार खेलने गया, संयोगवश वह रास्ता भूलकर घने जंगल में जा पहुँचा। उसे रास्ता ढूंढते-ढूंढते रात्रि हो गई और वर्षा होने लगी। राजा बहुत डर गया और किसी प्रकार उस भयानक जंगल में रात्रि बिताने के लिए विश्राम का स्थान ढूंढने लगा। कुछ दूरी परContinue reading “एक कथा -मेरी भी और आपकी भी”