संतों महात्माओं के उपदेश का आदर करो और खुद को पहचानों आप क्या हो और क्या कर रहे हो ?एक भिखारी था । उसने सम्राट होने के लिए कमर कसी और चौराहे पर अपनी फटी-पुरानी चादर बिछा दी, अपनी हाँडी रख दी और सुबह-दोपहर-शाम भीख माँगना शुरू कर दिया क्योंकि उसे सम्राट होना था। लेकिनContinue reading “🧘🏽♂️बाहर नहीं अंदर खोजें🧘🏽♂️”
Tag Archives: आध्यात्म
रामायण
रामायण…‘रा’ का अर्थ है प्रकाश, ‘मा’ का अर्थ है मेरे भीतर, यानी रामा का अर्थ है मेरे भीतर का प्रकाश। दशरथ और कौसल्या ने राम का जन्म दिया। दशरथ का अर्थ है 10 रथ। दस रथ 5 इन्द्रिय अंगों (ज्ञानेंद्रिय) और 5 क्रिया अंगों (कर्मेन्द्रिय) के प्रतीक हैं। कौशल्या का अर्थ है कौशल। 10 रथोंContinue reading “रामायण”
परमात्मा खुद लेने आता है!
एक बादशाह ने वज़ीर से पूछा- परमात्मा के साथ मिलाप कैसे हो सकता है? वजीर बोला, परमात्मा स्वयं कामिल मुर्शिद का रूप धारण करके जीव को अपने साथ मिलाने के लिए इस संसार में आता है। बादशाह बोला, परमात्मा के पास तो फरिश्तों की फौज है, फिर उसे स्वयं इंसान के रूप में यहां आनेContinue reading “परमात्मा खुद लेने आता है!”
श्रद्धा के फूल
एक बार किसी गांव में एक बडे संत महात्मा का अपने शिष्यो सहित आगमन हुआ। सब इस होड़ में लग गये कि क्या भेंट करें। इधर गाँव में एक गरीब मोची था। उसने देखा कि मेरे घर के बाहर के तालाब में बेमौसम का एक कमल खिला है। उसकी इच्छा हुई कि, आज नगर मेंContinue reading “श्रद्धा के फूल”
परमार्थ के मार्ग में साधक की चार अवस्थाएँ
” परमार्थ के मार्ग में साधक की चार अवस्थाएँ 1. कर्मकाण्ड या शरीयत : अच्छे कार्य करना जैसा कि संसार के सब धार्मिक ग्रन्थों में बताया गया है । 2. उपासना या तरीक़त : किसी कामिल गुरु के आदेश और मार्ग – दर्शन के अनुसार परमार्थ के कार्य करना । मन और इन्द्रियों को वशContinue reading “परमार्थ के मार्ग में साधक की चार अवस्थाएँ”
गुरु की मौज
“परमार्थी साखी” ये बात उन दिनों की है जब बाबा जैमल सिंह जी ने महाराज सावन सिंह जी को अपनी गुरु गद्दी सौपने का निर्णय कर लिया था। उस दिन बाबा जैमल सिंह ने महाराज सावन सिंह जी से कहा कि – जी मेरे लिए अकाल पुरुष का हुकुम आ चूका है अब मेरे बादContinue reading “गुरु की मौज”
मानव जीवन का उद्देश्य
परमात्मा की प्राप्ति (संत दादू दयाल जी …….) परमात्मा की प्राप्ति मनुष्य – जन्म में ही सम्भव है । मानव शरीर धारण करके ही हम परमात्मा के सच्चे नाम की नौका पर चढ़कर इस विशाल भवसागर को पार कर सकते हैं । मानव शरीर को परमात्मा का मन्दिर , नर – नारायणी देह या मुक्तिContinue reading “मानव जीवन का उद्देश्य”
ज्योतिष आद्यात्म की नजर से…
https://wp.me/pc6WiR-47 इसे जरूर पढ़े।
शूरवीर (मदन साहिब रचित ग्रंथ से)
विद्यार्थी से आशा की जाती है कि स्कूल की वर्दी को लज्जित न करे । वह कोई ऐसा काम न करे जिससे स्कूल की बदनामी हो । सैनिक से आशा की जाती है कि युद्ध के मैदान में पीठ न दिखाए ताकि उसके देश की सेना का नाम बदनाम न हो । इसी प्रकार शिष्यContinue reading “शूरवीर (मदन साहिब रचित ग्रंथ से)”
अपनी मृत्यु…अपनो की मृत्यु डरावनी लगती है
अपनी मृत्यु…अपनो की मृत्यु डरावनी लगती है बाकी तो मौत का उत्सव मनाता है मनुष्य… मौत के स्वाद काचटखारे लेता मनुष्यथोड़ा कड़वा लिखा है पर मन का लिखा है…… … मौत से प्यार नहीं , मौत तो हमारा स्वाद है । बकरे का, पाए का, तीतर का, मुर्गे का, हलाल का, बिना हलाल का, ताजाContinue reading “अपनी मृत्यु…अपनो की मृत्यु डरावनी लगती है”