सेवा से फायदा ही फायदा है।

मुलतान का एक मशहूर और भक्त कारीगर निज़ामुद्दीन ब्यास सतसंग घर को बहुत ही लगन प्यार से बनाने में लगा रहा। हज़ूर जब भी उसे अपनी मजदूरी लेने को कहते तो कहता कि काम खत्म होने पर इकट्ठी ले लूंगा। जब काफी महीने बीत गये तो हजूर जी ने फिर मजदूरी लेने को कहा। निज़ामुद्दीनContinue reading “सेवा से फायदा ही फायदा है।”

मालिक कैसे दया करता है ?

सतगुरु के बिना हकीक़त का भेद नहीं खुल सकता , न कोई मन – माया के बंधनों से छूट सकता है और बिना शब्द के न कोई मालिक से मिल सकता है । केवल सतगुरु ही सुरत को शब्द के साथ जोड़ता है । महाराज सावन सिंह गुरु अमरदास जी के समय का वृत्तांत हैContinue reading “मालिक कैसे दया करता है ?”

गूंगे का गुड़

सन्तों – महात्माओं ने आन्तरिक सूक्ष्म रूहानी अनुभवों , रूहानी मण्डलों की स्थिति और परमात्मा से मिलाप के सहज ज्ञान और आनन्द को अकथ , अकह , ला – बयान कहा है । यह गूंगे का गुड़ है । जिस तरह गूंगा व्यक्ति गुड़ का स्वाद बयान नहीं कर सकता , उसी प्रकार इस सूक्ष्मContinue reading “गूंगे का गुड़”

व्यर्थ गयी कमाई

जनम जनम की इस मन कउ मल लागी काला होआ सिआह ॥ खंनली धोती उजली न होवई जे सउ धोवण पाह ॥ गुरु अमरदास पराशर जी सारी उम्र योगाभ्यास में रहे । पूर्ण योगी होकर घर को वापस आ रहे थे । रास्ते में एक नदी पड़ती थी । जब वहाँ आये तो मल्लाह सेContinue reading “व्यर्थ गयी कमाई”

बरतन को टकोरना

सील गहनि सब की सहनि , कहनि हीय मुख राम । तुलसी रहिए एहि रहनि , संत जनन को काम ॥ गोस्वामी तुलसीदास दादू जी एक कामिल फ़क़ीर हुए हैं । उनका जन्म मुसलमान परिवार में हुआ था । एक बार दो पंडित आपके पास इस ग़रज़ से आये कि चलकर सत्संग सुनें और गुरुContinue reading “बरतन को टकोरना”

काला नूर

जो नाम लेकर रख छोड़े , उसे फ़ायदा कुछ नहीं । जिस तरह किसी कुम्हार को हीरा मिल गया , उसने गधे के गले में बाँध दिया , कद्र नहीं की ।महाराज सावन सिंह एक मिरासी ग़लती से मसजिद में जा पहुँचा । वहाँ पाँच नमाज़ी मौजूद थे । उन्होंने कहा कि आओ , वुजूContinue reading “काला नूर”

डल्ला की परीक्षा

मैं तेरी चितौनियों में उलझा हुआ हूँ , हे प्रभु ! मुझे शर्मिंदा न होने दे । जब तू मेरी सूझ बढ़ायेगा , तब मैं तेरे हुक्म अनुसार चलूँगा । साम्ज़ ज़िक्र है कि मुसलमानों की हुकूमत के दिनों में एक ऐसा समय आया जब गुरु गोबिन्द सिंह जी को मजबूरन आनन्दपुर छोड़ना पड़ा ।Continue reading “डल्ला की परीक्षा”

किसका सेवक ?

कुटुम्ब परिवार मतलब का । बिना धन पास नहिं आई।।स्वामी जी महाराज गुरु गोबिन्द सिंह जी का दरबार लगा हुआ था । सिक्खी का मज़मून चल रहा था । गुरु साहिब ने कहा कि गुरु का शिष्य कोई – कोई है , बाक़ी सब अपने मन के गुलाम हैं या स्त्री और बच्चों के गुलामContinue reading “किसका सेवक ?”

झूठे वायदों की सज़ा

अनेक लोग अपने ज्ञान का प्रदर्शन करके अपनी प्रशंसा करवाने का प्रयास करते हैं पर वे धन्य हैं जिन्होंने प्रभु प्रेम के लिए अपने मन को अन्य सभी इच्छाओं से ख़ाली कर दिया है ।सेंट फ्रांसिस ऑफ़ असिसी ज़िक्र है कि बुल्लेशाह बड़ा आलिम – फ़ाज़िल था । चालीस साल खोज की , बहुत –Continue reading “झूठे वायदों की सज़ा”

प्रेम से प्रेम , घृणा से घृणा

परमात्मा प्रेम है । जो प्रेम में डूबा हुआ है , वह परमात्मा में समाया हुआ है , और परमात्मा उसमें समाया हुआ है । सेंट जॉन कहते हैं कि एक बार अकबर बादशाह और बीरबल कहीं जा रहे थे । कुछ फ़ासले पर उन्हें एक जाट आता नज़र आया । अकबर बादशाह ने बीरबलContinue reading “प्रेम से प्रेम , घृणा से घृणा”

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