भगवान कृष्ण ने गीता ( 7:16 )

भगवान कृष्ण ने गीता ( 7:16 ) में बताया है , “ चार प्रकार के लोग परमेश्वर की आराधना करते हैं : दु : खी , भोगों की चाह रखनेवाले , परमार्थी और बुद्धिमान ज्ञानी । ” दुःखी , दु : खों की निवृत्ति के लिए ; भोगी , भोगों की प्राप्ति के लिए ;Continue reading “भगवान कृष्ण ने गीता ( 7:16 )”

प्रेम से प्रेम , घृणा से घृणा

परमात्मा प्रेम है । जो प्रेम में डूबा हुआ है , वह परमात्मा में समाया हुआ है , और परमात्मा उसमें समाया हुआ है । सेंट जॉन कहते हैं कि एक बार अकबर बादशाह और बीरबल कहीं जा रहे थे । कुछ फ़ासले पर उन्हें एक जाट आता नज़र आया । अकबर बादशाह ने बीरबलContinue reading “प्रेम से प्रेम , घृणा से घृणा”

चार राम

जग में चारों राम हैं , तीन राम व्यवहार । एक्कारमा चौथा राम निज सार है , ताका करो विचार ॥ एक राम दशरथ घर डोलै , एक राम घट घट में बोले । एक राम का सकल पसारा , एक राम त्रिभुवन ते न्यारा ॥ कबीर समग्र , भाग 1 , पृ .462 एकContinue reading “चार राम”

नरकों और स्वर्गों को जला दो

सुरग मुकति बैकुंठ सभ बांछह नित आसा आस करीजै । हर दरसन के जन मुकति न मांगह मिल दरसन त्रिपत मन धीजै।। गुरु रामदास एक दिन बसरा की महात्मा राबिया बसरी फूट – फूटकर रो रही थी , मानो उसका हृदय फट रहा हो । उसको दुःख से व्याकुल देखकर उसके पड़ोसी उसके चारों ओरContinue reading “नरकों और स्वर्गों को जला दो”

परमात्मा से प्रार्थना

” मेरे मालिक, मै बिलकुल नादान हूं, मै नहीं जानता तुझसे क्या मांगू? जो तू मेरे लिए उचित समझे वहीं दे दे और मुझे वो शक्ति और बुद्धि बक्ष कि जो कुछ तू दे या जहां और जैसे तू रखे उसी में मै सदा खुश रहूं । मुझमें कोई गुण नहीं, कोई भक्ति नहीं। मेरेContinue reading “परमात्मा से प्रार्थना”

गुरु समान दूसर नहिं कोय

प्रभुरूपी सत्य के सार की कल्पना भी असंभव है । उस परम मित्र का वर्णन कोई कैसे कर सकता है जिसके समान कोई दूसरा है ही नहीं।। मौलाना रूम जब शुकदेव गुरु धारण करके , नाम लेकर उनके आदेशानुसार कमाई करके अपने पिता वेदव्यास के पास गया , तो उन्होंने पूछा , ‘ गुरु कैसाContinue reading “गुरु समान दूसर नहिं कोय”

बादशाह का ख़ाली हाथ

यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त कर ले और अपनी आत्मा को खो दे , तो उसे क्या लाभ होगा । सेंट मार्क महमूद ग़ज़नवी ने हिंदुस्तान पर सत्रह हमले किये और बहुत – सा धन – दौलत , सोना – चाँदी , हीरे रे – जवाहरात लूटकर ग़ज़नी ले गया । वह तुर्क थाContinue reading “बादशाह का ख़ाली हाथ”

बेदाग दाढ़ी

मन हमारा दुश्मन है और इसे दुश्मन समझते हुए इसकी हरकतों पर चौकीदारी करनी चाहिए । महाराज सावन सिंह एक स्त्री थी । उसके रिश्तेदारों में एक अच्छा कमाई वाला महात्मा था । कुछ तो कमाई और कुछ बेफ़िक्री और बेपरवाही के फलस्वरूप उसके चेहरे पर हमेशा रौनक़ और ख़ुशी रहती थी । उसकी शोभायमानContinue reading “बेदाग दाढ़ी”

झूठे वायदों की सज़ा

अनेक लोग अपने ज्ञान का प्रदर्शन करके अपनी प्रशंसा करवाने का प्रयास करते है पर वे धन्य हैं जिन्होंने प्रभु प्रेम के लिए अपने मन को अन्य सभी इच्छाओं से ख़ाली कर दिया है । सेंट फ्रांसिस ऑफ़ असिसी ज़िक्र है कि बुल्लेशाह बड़ा आलिम – फ़ाज़िल था । चालीस साल खोज की , बहुतContinue reading “झूठे वायदों की सज़ा”

फिर कभी जलेबी मत माँगना

साकत नर प्रानी सद भूखे नित भूखन भूख करीजै ॥ गुरु रामदास ज़िक्र है कि एक मुसलमान फ़क़ीर एक दिन बाज़ार से गुज़र रहा था । रास्ते में एक हलवाई की दुकान थी । उसने बड़ी अच्छी जलेबियाँ सजाकर रखी हुई थीं । मन ने कहा कि जलेबियाँ खानी हैं । पास पैसा था नहींContinue reading “फिर कभी जलेबी मत माँगना”

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