ईद का दिन था , लोग ईद की नमाज अदा करके वापस आ रहे थे । राह में एक पूर्ण मुर्शीद का मुरीद खड़ा था , हर राहगीर से पूछ रहा था , सांई ईद कद है ? लोग हंसते और कहते ओ सांई तेरे को नहीं पता ईद तां अज है । उसी राहContinue reading “सांई ईद कद है ?”
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तू सच में बहुत दयालु हैं!
एक संत हुआ करते थे । उनकी इबादत या भक्ति इस कदर थीं कि वो अपनी धुन में इतने मस्त हो जाते थे की उनको कुछ होश नहीं रहता था । उनकी अदा और चाल इतनी मस्तानी हो जाती थीं । वो जहाँ जाते , देखने वालों की भीड़ लग जाती थी। और उनके दर्शनContinue reading “तू सच में बहुत दयालु हैं!”
शिष्य तैयार
जब शिष्य तैयार हो जाता है तो उसका गुरु से मिलाप हो जाता है । सच पूछो तो गुरु ऐसे शिष्य की आप ही तलाश कर लेता है। गुरु के लिए आत्मा को ऊपर ले जाना मुश्किल नहीं , लेकिन उचित अभ्यास के बिना ऊपर ले जाने से उस आत्मा का नुकसान होता है ।Continue reading “शिष्य तैयार”
परमार्थ के मार्ग में साधक की चार अवस्थाएँ
” परमार्थ के मार्ग में साधक की चार अवस्थाएँ 1. कर्मकाण्ड या शरीयत : अच्छे कार्य करना जैसा कि संसार के सब धार्मिक ग्रन्थों में बताया गया है । 2. उपासना या तरीक़त : किसी कामिल गुरु के आदेश और मार्ग – दर्शन के अनुसार परमार्थ के कार्य करना । मन और इन्द्रियों को वशContinue reading “परमार्थ के मार्ग में साधक की चार अवस्थाएँ”
गुरु की मौज
“परमार्थी साखी” ये बात उन दिनों की है जब बाबा जैमल सिंह जी ने महाराज सावन सिंह जी को अपनी गुरु गद्दी सौपने का निर्णय कर लिया था। उस दिन बाबा जैमल सिंह ने महाराज सावन सिंह जी से कहा कि – जी मेरे लिए अकाल पुरुष का हुकुम आ चूका है अब मेरे बादContinue reading “गुरु की मौज”
ज्योतिष आद्यात्म की नजर से…
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शूरवीर (मदन साहिब रचित ग्रंथ से)
विद्यार्थी से आशा की जाती है कि स्कूल की वर्दी को लज्जित न करे । वह कोई ऐसा काम न करे जिससे स्कूल की बदनामी हो । सैनिक से आशा की जाती है कि युद्ध के मैदान में पीठ न दिखाए ताकि उसके देश की सेना का नाम बदनाम न हो । इसी प्रकार शिष्यContinue reading “शूरवीर (मदन साहिब रचित ग्रंथ से)”
अपनी मृत्यु…अपनो की मृत्यु डरावनी लगती है
अपनी मृत्यु…अपनो की मृत्यु डरावनी लगती है बाकी तो मौत का उत्सव मनाता है मनुष्य… मौत के स्वाद काचटखारे लेता मनुष्यथोड़ा कड़वा लिखा है पर मन का लिखा है…… … मौत से प्यार नहीं , मौत तो हमारा स्वाद है । बकरे का, पाए का, तीतर का, मुर्गे का, हलाल का, बिना हलाल का, ताजाContinue reading “अपनी मृत्यु…अपनो की मृत्यु डरावनी लगती है”
परमात्मा के नजदीक कोन?
कष्ट , पीड़ा , दुःख और रोग हमारी खूब सफ़ाई करते हैं । वे हमें बेहतर इनसान बनाते हैं और परमात्मा के नज़दीक ले आते हैं । भगवान कृष्ण ( भागवत में ) उद्धव से कहते हैं , ‘ मैं अपने सबसे प्यारे भक्तों को तीन दुर्लभ उपहार या सौगातें देता हूँ । वे हैंContinue reading “परमात्मा के नजदीक कोन?”
सोच का फर्क (Motivational story):
🌻सोच का फर्क (Motivational story): एक गरीब आदमी बड़ी मेहनत से एक – एक रूपया जोड़ कर मकान बनवाता है . उस मकान को बनवाने के लिए वह पिछले 20 वर्षों से एक – एक पैसा बचत करता है ताकि उसका परिवार छोटे से झोपड़े से निकलकर पक्के मकान में सुखी रह सके .आखिरकार एकContinue reading “सोच का फर्क (Motivational story):”