मदद

एक समय मोची का काम करने वाले व्यक्ति को रात में भगवान ने सपना दिया और कहा कि कल सुबह मैं तुझसे मिलने तेरी दुकान पर आऊंगा।मोची की दुकान काफी छोटी थी और उसकी आमदनी भी काफी सीमित थी। खाना खाने के बर्तन भी थोड़े से थे। इसके बावजूद वो अपनी जिंदगी से खुश रहताContinue reading “मदद”

“निमाणा-निताणा”

एक बार एक सत्संगी दरबार साहिब आ रहा था।लंगर के लिये कुछ रसद भी साथ उठा कर आ रहा था। यह गुरु अर्जुन देव जी के समय की बात है। गर्मी के दिन थे।अमृतसर शहर से थोड़ा पहले वह एक बृक्ष की छावं में आराम करने बैठा। गुरु के दर्शन के लिए वह पहली बारContinue reading ““निमाणा-निताणा””

मन की बाँसुरी

” बाँस की बाँसुरी में से आवाज निकलती है क्योंकि वह खोखली होती है। ठोस लकड़ी का टुकड़ा बाँस की बाँसुरी वाला काम नहीं कर सकता। अभ्यास के समय मन को विचारों से ख़ाली कर देना बाँसुरी बन जाने के समान है। जब अपने आप को अन्तर में विचारों से पूरी तरह ख़ाली करके भजनContinue reading “मन की बाँसुरी”

मन में दीनता और अजीजी रखना क्यों जरूरी है?

सब महात्मा हमें यही उपदेश देते हैं कि इस मनुष्य-जन्म में आकर अपनी देह के अंदर मालिक की खोज करो लेकिन हम देह के अंदर मालिक को ढूँढने के बजाय उल्टे इस देह के ही मान और अहंकार में फँस जाते हैं। ज़रा गौर करके देखें कि हम इस शरीर में बैठकर किस चीज़ काContinue reading “मन में दीनता और अजीजी रखना क्यों जरूरी है?”

सेवा से फायदा ही फायदा है।

मुलतान का एक मशहूर और भक्त कारीगर निज़ामुद्दीन ब्यास सतसंग घर को बहुत ही लगन प्यार से बनाने में लगा रहा। हज़ूर जब भी उसे अपनी मजदूरी लेने को कहते तो कहता कि काम खत्म होने पर इकट्ठी ले लूंगा। जब काफी महीने बीत गये तो हजूर जी ने फिर मजदूरी लेने को कहा। निज़ामुद्दीनContinue reading “सेवा से फायदा ही फायदा है।”

राम कहा हैं?

चौथी पातशाही श्री गुरु रामदास जी कहते हैं : कासट मह जिउ है बैसंतर मथ संजम काट कढीजै । राम नाम है जोत सबाई तत गुरमत काढ लईजै ॥ जिस तरह लकड़ी के अंदर अग्नि होती है , न अग्नि नज़र आती है , ही उस अग्नि से हम फ़ायदा उठा सकते हैं । जिसContinue reading “राम कहा हैं?”

करना क्या है? कर क्या रहे है?

धंधै धावत जग बाधिआ ना बूझै वीचार ॥ जमण मरण विसारिआ मनमुख मुगध गवार ॥ गुरु साहिब फ़रमाते हैं कि हम मनमुख हैं , मुगध हैं , गँवार हैं कि हम हमेशा पेट के धंधों में ही दिन – रात भटकते फिरते हैं । जिस मक़सद के लिए परमात्मा ने हमें यहाँ भेजा है उसकेContinue reading “करना क्या है? कर क्या रहे है?”

🧘🏽‍♂️बाहर नहीं अंदर खोजें🧘🏽‍♂️

संतों महात्माओं के उपदेश का आदर करो और खुद को पहचानों आप क्या हो और क्या कर रहे हो ?एक भिखारी था । उसने सम्राट होने के लिए कमर कसी और चौराहे पर अपनी फटी-पुरानी चादर बिछा दी, अपनी हाँडी रख दी और सुबह-दोपहर-शाम भीख माँगना शुरू कर दिया क्योंकि उसे सम्राट होना था। लेकिनContinue reading “🧘🏽‍♂️बाहर नहीं अंदर खोजें🧘🏽‍♂️”

मानव जीवन का उद्देश्य

परमात्मा की प्राप्ति (संत दादू दयाल जी …….) परमात्मा की प्राप्ति मनुष्य – जन्म में ही सम्भव है । मानव शरीर धारण करके ही हम परमात्मा के सच्चे नाम की नौका पर चढ़कर इस विशाल भवसागर को पार कर सकते हैं । मानव शरीर को परमात्मा का मन्दिर , नर – नारायणी देह या मुक्तिContinue reading “मानव जीवन का उद्देश्य”

शूरवीर (मदन साहिब रचित ग्रंथ से)

विद्यार्थी से आशा की जाती है कि स्कूल की वर्दी को लज्जित न करे । वह कोई ऐसा काम न करे जिससे स्कूल की बदनामी हो । सैनिक से आशा की जाती है कि युद्ध के मैदान में पीठ न दिखाए ताकि उसके देश की सेना का नाम बदनाम न हो । इसी प्रकार शिष्यContinue reading “शूरवीर (मदन साहिब रचित ग्रंथ से)”

Design a site like this with WordPress.com
Get started