जब एक मटका खरीदा जाता है तो उसे पत्थर से बजाके परखा जाता है।पर यदि उस पत्थर की जगह मिट्टी के ठेलें से मटके को बजाया जाए तो मटके से पहले वह मिट्टी का ठेला टूट कर बिखर जाएगा।गुरु को परखने के पहले सिख को मजबूत पत्थर बनना होगा।हमारा तो ख़ुद का विश्वास मिट्टी कीContinue reading “गुरु में विश्वास अटल रखना है”
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सतगुरू सबको देत हैं, लेता नाहीं कोए
सतगुरू सबको देत हैं, लेता नाहीं कोए यदि सालों साल भजन सिमरन करते हुए भी हमें आत्मिक आनंद और शांति नहीं मिल रही है, तो इसके कारणों की जाँच तो हमें अवश्य करनी चाहिये। जैसे लोहा, यदि पारस को छू जाये तो फौरन सोना बन जाता है। लेकिन अगर लोहा खोटा हो या उस परContinue reading “सतगुरू सबको देत हैं, लेता नाहीं कोए”
मौत की खुशी किसे होती है?
अगर कोई आदमी इस दुनिया में खुशी-खुशी मरता है तो केवल शब्द का अभ्यासी ही बाकी कुल दुनिया बादशाह से लेकर गरीब तक रोते हुए ही जाते हैं। ढिलवाँ गाँव का जिक्र है। एक स्त्री शरीर छोड़ने लगी तो अपने घर वालों को बुलाकर कहा, ‘सतगुरु आ गए हैं, अब मेरी तैयारी है। उम्मीद हैContinue reading “मौत की खुशी किसे होती है?”
सेवा से फायदा ही फायदा है।
मुलतान का एक मशहूर और भक्त कारीगर निज़ामुद्दीन ब्यास सतसंग घर को बहुत ही लगन प्यार से बनाने में लगा रहा। हज़ूर जब भी उसे अपनी मजदूरी लेने को कहते तो कहता कि काम खत्म होने पर इकट्ठी ले लूंगा। जब काफी महीने बीत गये तो हजूर जी ने फिर मजदूरी लेने को कहा। निज़ामुद्दीनContinue reading “सेवा से फायदा ही फायदा है।”
तू सच में बहुत दयालु हैं!
एक संत हुआ करते थे । उनकी इबादत या भक्ति इस कदर थीं कि वो अपनी धुन में इतने मस्त हो जाते थे की उनको कुछ होश नहीं रहता था । उनकी अदा और चाल इतनी मस्तानी हो जाती थीं । वो जहाँ जाते , देखने वालों की भीड़ लग जाती थी। और उनके दर्शनContinue reading “तू सच में बहुत दयालु हैं!”
राम कहा हैं?
चौथी पातशाही श्री गुरु रामदास जी कहते हैं : कासट मह जिउ है बैसंतर मथ संजम काट कढीजै । राम नाम है जोत सबाई तत गुरमत काढ लईजै ॥ जिस तरह लकड़ी के अंदर अग्नि होती है , न अग्नि नज़र आती है , ही उस अग्नि से हम फ़ायदा उठा सकते हैं । जिसContinue reading “राम कहा हैं?”
जीवित गुरु की आवश्यकता
1. गुरु और गोविन्द एक ही हैं सच्चे सन्त परमात्मा में मिलकर परमात्मा रूप हो चुके होते हैं । अत : परमात्मा की प्राप्ति सन्तों द्वारा ही हो सकती है और सन्त परमात्मा की कृपा से ही मिलते हैं । स्वयं भगवान् का यह कहना है कि जिस तरह दूध में मिलकर पानी और जलContinue reading “जीवित गुरु की आवश्यकता”