” बाँस की बाँसुरी में से आवाज निकलती है क्योंकि वह खोखली होती है। ठोस लकड़ी का टुकड़ा बाँस की बाँसुरी वाला काम नहीं कर सकता। अभ्यास के समय मन को विचारों से ख़ाली कर देना बाँसुरी बन जाने के समान है। जब अपने आप को अन्तर में विचारों से पूरी तरह ख़ाली करके भजनContinue reading “मन की बाँसुरी”
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मौत की खुशी किसे होती है?
अगर कोई आदमी इस दुनिया में खुशी-खुशी मरता है तो केवल शब्द का अभ्यासी ही बाकी कुल दुनिया बादशाह से लेकर गरीब तक रोते हुए ही जाते हैं। ढिलवाँ गाँव का जिक्र है। एक स्त्री शरीर छोड़ने लगी तो अपने घर वालों को बुलाकर कहा, ‘सतगुरु आ गए हैं, अब मेरी तैयारी है। उम्मीद हैContinue reading “मौत की खुशी किसे होती है?”
सेवा से फायदा ही फायदा है।
मुलतान का एक मशहूर और भक्त कारीगर निज़ामुद्दीन ब्यास सतसंग घर को बहुत ही लगन प्यार से बनाने में लगा रहा। हज़ूर जब भी उसे अपनी मजदूरी लेने को कहते तो कहता कि काम खत्म होने पर इकट्ठी ले लूंगा। जब काफी महीने बीत गये तो हजूर जी ने फिर मजदूरी लेने को कहा। निज़ामुद्दीनContinue reading “सेवा से फायदा ही फायदा है।”
राम कहा हैं?
चौथी पातशाही श्री गुरु रामदास जी कहते हैं : कासट मह जिउ है बैसंतर मथ संजम काट कढीजै । राम नाम है जोत सबाई तत गुरमत काढ लईजै ॥ जिस तरह लकड़ी के अंदर अग्नि होती है , न अग्नि नज़र आती है , ही उस अग्नि से हम फ़ायदा उठा सकते हैं । जिसContinue reading “राम कहा हैं?”
करना क्या है? कर क्या रहे है?
धंधै धावत जग बाधिआ ना बूझै वीचार ॥ जमण मरण विसारिआ मनमुख मुगध गवार ॥ गुरु साहिब फ़रमाते हैं कि हम मनमुख हैं , मुगध हैं , गँवार हैं कि हम हमेशा पेट के धंधों में ही दिन – रात भटकते फिरते हैं । जिस मक़सद के लिए परमात्मा ने हमें यहाँ भेजा है उसकेContinue reading “करना क्या है? कर क्या रहे है?”
🧘🏽♂️बाहर नहीं अंदर खोजें🧘🏽♂️
संतों महात्माओं के उपदेश का आदर करो और खुद को पहचानों आप क्या हो और क्या कर रहे हो ?एक भिखारी था । उसने सम्राट होने के लिए कमर कसी और चौराहे पर अपनी फटी-पुरानी चादर बिछा दी, अपनी हाँडी रख दी और सुबह-दोपहर-शाम भीख माँगना शुरू कर दिया क्योंकि उसे सम्राट होना था। लेकिनContinue reading “🧘🏽♂️बाहर नहीं अंदर खोजें🧘🏽♂️”
ऊंची उड़ान
बहुत समय पहले की बात है,एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये, वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे,राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया। कुछ समय पश्चात राजा ने देखाContinue reading “ऊंची उड़ान”
ध्यान में मौत का उत्सव
एक साधु जीवनभर इतना प्रसन्न था कि लोग हैरान थे। लोगों ने कभी उसे उदास नहीं देखा, कभी पीड़ित नहीं देखा।उसके शरीर छोड़ने का वक्त आया और उसने कहा कि अब मैं तीन दिन बाद मर जाऊंगा। यह मैं इसलिए बता रहा हूं कि जो आदमी जीवन भर हंसता था, उसकी मौत पर कोई रोएContinue reading “ध्यान में मौत का उत्सव”
Meaning and Value of Satsang
At the Dera in March 1983, Daryai Lal Kapur, asked Maharaj Charan Singh ji to talk about the Meaning and Value of Satsang. Q. Maharaj ji, my understanding of the term ‘Satsang’ is where there are Two Satsangis or more gathered together at a proper place, reading some text bearing Santmat and trying to understandContinue reading “Meaning and Value of Satsang”
ब्रह्मचर्य के लाभ
डॉक्टर निकलसन कहते हैं कि स्त्रियों और पुरुषों में शरीर का सबसे अच्छा रक्त संतानोत्पत्ति के तत्त्वों को बनाने में खर्च होता है । एक पवित्र जीवन जीनेवाले मनुष्य में वीर्य का तत्त्व शरीर में दुबारा जज़्ब होता है और रक्त के प्रवाह में मिलकर उत्तम शारीरिक , दिली और दिमागी ताक़त को बनाता हैContinue reading “ब्रह्मचर्य के लाभ”