भगवान कृष्ण ने गीता ( 7:16 ) में बताया है , “ चार प्रकार के लोग परमेश्वर की आराधना करते हैं : दु : खी , भोगों की चाह रखनेवाले , परमार्थी और बुद्धिमान ज्ञानी । ” दुःखी , दु : खों की निवृत्ति के लिए ; भोगी , भोगों की प्राप्ति के लिए ;Continue reading “भगवान कृष्ण ने गीता ( 7:16 )”
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डल्ला की परीक्षा
मैं तेरी चितौनियों में उलझा हुआ हूँ , हे प्रभु ! मुझे शर्मिंदा न होने दे । जब तू मेरी सूझ बढ़ायेगा , तब मैं तेरे हुक्म अनुसार चलूँगा । साम्ज़ ज़िक्र है कि मुसलमानों की हुकूमत के दिनों में एक ऐसा समय आया जब गुरु गोबिन्द सिंह जी को मजबूरन आनन्दपुर छोड़ना पड़ा ।Continue reading “डल्ला की परीक्षा”
प्रेम से प्रेम , घृणा से घृणा
परमात्मा प्रेम है । जो प्रेम में डूबा हुआ है , वह परमात्मा में समाया हुआ है , और परमात्मा उसमें समाया हुआ है । सेंट जॉन कहते हैं कि एक बार अकबर बादशाह और बीरबल कहीं जा रहे थे । कुछ फ़ासले पर उन्हें एक जाट आता नज़र आया । अकबर बादशाह ने बीरबलContinue reading “प्रेम से प्रेम , घृणा से घृणा”
एक कान से सुनना , दूसरे से निकाल देना
उस प्रभु ने अपार कृपा करके आपको एक ऐसी उत्तम दात बख्शी है जिसके सामने इस संसार की सारी धन – दौलत तुच्छ है । पर इस दात का लाभ आपको तभी पहुँचेगा जब आप उसका अभ्यास करेंगे । महाराज सावन सिंह दिल्ली में एक महाजन था । उसे साधु – संतों के सत्संग सुननेContinue reading “एक कान से सुनना , दूसरे से निकाल देना”
ईश्वर के दर्शन क्यो नहीं होते ?
एक महात्मा के पास दूर-दूर से लोग अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए आते थे। एक बार एक व्यक्ति उनके पास आया और बोला,’महाराज, मैं लंबे समय से ईश्वर की भक्ति कर रहा हूं, फिर भी मुझे ईश्वर के दर्शन नहीं होते। कृपया मुझे उनके दर्शन कराइए।’महात्मा बोले,–‘तुम्हें इस संसार में कौन सी चीजेंContinue reading “ईश्वर के दर्शन क्यो नहीं होते ?”
कबीर साहिब द्वारा राजा की परीक्षा
जब आप नौ दरवाज़ों को छोड़कर ब्रह्म , पारब्रह्म में जायेंगे तो आपको पता लग जायेगा कि गुरु क्या है और क्या देता है ।अगर अंदर जाकर देख लो तो यक़ीन पुख़्ता हो जायेगा ।महाराज सावन सिंह कबीर साहिब जुलाहा थे । राजा बीर सिंह राजपूत उनका सेवक था । उसका उनके साथ बहुत प्यारContinue reading “कबीर साहिब द्वारा राजा की परीक्षा”
नरकों और स्वर्गों को जला दो
सुरग मुकति बैकुंठ सभ बांछह नित आसा आस करीजै । हर दरसन के जन मुकति न मांगह मिल दरसन त्रिपत मन धीजै।। गुरु रामदास एक दिन बसरा की महात्मा राबिया बसरी फूट – फूटकर रो रही थी , मानो उसका हृदय फट रहा हो । उसको दुःख से व्याकुल देखकर उसके पड़ोसी उसके चारों ओरContinue reading “नरकों और स्वर्गों को जला दो”
परमात्मा से प्रार्थना
” मेरे मालिक, मै बिलकुल नादान हूं, मै नहीं जानता तुझसे क्या मांगू? जो तू मेरे लिए उचित समझे वहीं दे दे और मुझे वो शक्ति और बुद्धि बक्ष कि जो कुछ तू दे या जहां और जैसे तू रखे उसी में मै सदा खुश रहूं । मुझमें कोई गुण नहीं, कोई भक्ति नहीं। मेरेContinue reading “परमात्मा से प्रार्थना”
गुरु समान दूसर नहिं कोय
प्रभुरूपी सत्य के सार की कल्पना भी असंभव है । उस परम मित्र का वर्णन कोई कैसे कर सकता है जिसके समान कोई दूसरा है ही नहीं।। मौलाना रूम जब शुकदेव गुरु धारण करके , नाम लेकर उनके आदेशानुसार कमाई करके अपने पिता वेदव्यास के पास गया , तो उन्होंने पूछा , ‘ गुरु कैसाContinue reading “गुरु समान दूसर नहिं कोय”
पपीहे का प्रण
मी जिउ चात्रिक जल प्रेम पिआसा ॥ जिउ मीना जल माहे उलासा ॥ नानक हर रस पी त्रिपतासा।। गुरु नानक एक दिन कबीर साहिब गंगा के किनारे घूम रहे थे । उन्होंने देखा कि एक पपीहा प्यास से निढाल होकर नदी में गिर गया है । पपीहा स्वाति बूंद के अलावा दूसरा पानी नहीं पीताContinue reading “पपीहे का प्रण”