बाज़ीगर और कठपुतलियांँ

जिस बाज़ीगर (परमात्मा) ने कठपुतलियों का खेल रचा होता है वे सारी कठपुतलियाँ उसके थैले में होती है वह अपनी कठपुतलियों को थैलें में से बाहर निकालता है और उनको टेबल पर यानी दुनिया में सजाकर खुद परदे के पीछे बैठ जाता है हर कठपुतली एक डोर से बँधी होती है पर समस्या यह हैContinue reading “बाज़ीगर और कठपुतलियांँ”

गुरु में विश्वास अटल रखना है

जब एक मटका खरीदा जाता है तो उसे पत्थर से बजाके परखा जाता है।पर यदि उस पत्थर की जगह मिट्टी के ठेलें से मटके को बजाया जाए तो मटके से पहले वह मिट्टी का ठेला टूट कर बिखर जाएगा।गुरु को परखने के पहले सिख को मजबूत पत्थर बनना होगा।हमारा तो ख़ुद का विश्वास मिट्टी कीContinue reading “गुरु में विश्वास अटल रखना है”

“निमाणा-निताणा”

एक बार एक सत्संगी दरबार साहिब आ रहा था।लंगर के लिये कुछ रसद भी साथ उठा कर आ रहा था। यह गुरु अर्जुन देव जी के समय की बात है। गर्मी के दिन थे।अमृतसर शहर से थोड़ा पहले वह एक बृक्ष की छावं में आराम करने बैठा। गुरु के दर्शन के लिए वह पहली बारContinue reading ““निमाणा-निताणा””

सतगुरू सबको देत हैं, लेता नाहीं कोए

सतगुरू सबको देत हैं, लेता नाहीं कोए यदि सालों साल भजन सिमरन करते हुए भी हमें आत्मिक आनंद और शांति नहीं मिल रही है, तो इसके कारणों की जाँच तो हमें अवश्य करनी चाहिये। जैसे लोहा, यदि पारस को छू जाये तो फौरन सोना बन जाता है। लेकिन अगर लोहा खोटा हो या उस परContinue reading “सतगुरू सबको देत हैं, लेता नाहीं कोए”

मन की बाँसुरी

” बाँस की बाँसुरी में से आवाज निकलती है क्योंकि वह खोखली होती है। ठोस लकड़ी का टुकड़ा बाँस की बाँसुरी वाला काम नहीं कर सकता। अभ्यास के समय मन को विचारों से ख़ाली कर देना बाँसुरी बन जाने के समान है। जब अपने आप को अन्तर में विचारों से पूरी तरह ख़ाली करके भजनContinue reading “मन की बाँसुरी”

मौत की खुशी किसे होती है?

अगर कोई आदमी इस दुनिया में खुशी-खुशी मरता है तो केवल शब्द का अभ्यासी ही बाकी कुल दुनिया बादशाह से लेकर गरीब तक रोते हुए ही जाते हैं। ढिलवाँ गाँव का जिक्र है। एक स्त्री शरीर छोड़ने लगी तो अपने घर वालों को बुलाकर कहा, ‘सतगुरु आ गए हैं, अब मेरी तैयारी है। उम्मीद हैContinue reading “मौत की खुशी किसे होती है?”

परमात्मा से क्या मांगे

इस संसार में हमें परमात्मा से मांगने के लायक कुछ भी नहीं अगर कुछ मांगना ही है तो केवल एक चीज कि मालिक अंतर में अपने दर्शनों की दात बख्श । यदि संसार के लोग हमारे साथ कुछ ग़लत करते हैं तो गलत बो नहीं करते बल्कि हम उस समय अपने पुराने कर्मों का भुगतानContinue reading “परमात्मा से क्या मांगे”

मन में दीनता और अजीजी रखना क्यों जरूरी है?

सब महात्मा हमें यही उपदेश देते हैं कि इस मनुष्य-जन्म में आकर अपनी देह के अंदर मालिक की खोज करो लेकिन हम देह के अंदर मालिक को ढूँढने के बजाय उल्टे इस देह के ही मान और अहंकार में फँस जाते हैं। ज़रा गौर करके देखें कि हम इस शरीर में बैठकर किस चीज़ काContinue reading “मन में दीनता और अजीजी रखना क्यों जरूरी है?”

नाम की महिमा

आप तरै जन पितरा तारेसंगत मुकत सो पार उतारे। आप देखो, गुरु साहिब “नाम” की कितनी महिमा करते हैं। कहते हैं कि जो “नाम” की कमाई करते हैं, वे आप भी तर जाते हैं और उनके ‘पित्तरों’ को भी उनके अभ्यास से लाभ पहुँचता है। उच्च श्रेणी के भक्त के अभ्यास और भक्ति से उसकेContinue reading “नाम की महिमा”

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